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कला एवं संस्कृति

 

हमारे सम्पूर्ण भारतवर्ष की अंतरात्मा कला एवं संस्कृति में ही कहीं निहित है। कला एवं सांस्कृतिक कार्यों को बढ़ावा देना, हमारे धर्म को बढ़ावा देना ही है। हमारा प्रदेश कला एवं संस्कृति की दृष्टि से केवल देश में ही नहीं अपितु विश्वभर में अपना एक अलग स्थान बनाए हुए है। कला एवं संस्कृति हमें विरासत में मिली है।

भारतीय कला का अतीत अत्यंत प्राचीन है। हमारे मध्यप्रदेश के भीमबेटका की गुफाओं पर की गई कलात्मक चित्रकारी का इतिहास 6000 वर्षों से भी अधिक प्राचीन है। भारतीयों ने प्रागैतिहासिक काल मे ही जानवरों के चित्र उकेरना सीख लिया था।

मेरा स्वयं का मानना है कि हमारे प्रदेश ने हमेशा से ही अपनी विरासत एवं धरोहरों को भलीभांति सहेजकर रखा है। अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु आज भी प्रदेश में सिंहस्थ, रामलीला का मेला, महामृत्युंजय का मेला, सिंगाजी का मेला, बरमान का मेला का आयोजन बड़ी ही धूमधाम से किया जाता है।

कला और शिल्प के क्षेत्र में कलाकारों को प्रोत्साहन देने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा कई पुरस्कार भी समय समय पर दिए जाते रहे है। इनमें तानसेन पुरस्कार, कालिदास पुरस्कार, कुमार गंधर्व पुरस्कार, देवी अहिल्याबाई पुरस्कार प्रमुख है।