>    >  पर्यावरण।

 

पर्यावरण शब्द संस्कृत भाषा के ‘परि’ उपसर्ग और ‘आवरण’ से मिलकर बना है। जिसका अर्थ है हमारे चारों और स्थित आवरण। आज विश्वभर में आधुनिकीकरण एवं विकास के नाम पर हर दिन अंधाधुंध पेड़ो की कटाई की जा रही है। हमारे आवरण एवं आसपास की नैसर्गिक सुंदरता को क्षीण कर कंक्रीट का जाल बिछाया जा रहा है।

हरियाली एवं घने वनों से परिपूर्ण इस प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दशकों में लड़की के तस्कर भारी मात्रा में सक्रिय थे। इस दौरान कई बार अखबारों में पुलिस एवं लकड़ी चोरों की मुड़भेड़ भी खासी चर्चा में रही। कई वनकर्मियों ने तो डर के मारे अपना स्थानांतरण तक करवा लिया था।

सन 2003 में बनी प्रदेश भाजपा सरकार अपने शुरुआती दौर से ही पयार्वरण के मुद्दे पर जागरूक रही है। यह हमारी दूरदर्शी वन नीतियों का ही परिणाम है कि आज पूरे देश में सर्वाधिक वनाच्छादित क्षेत्र हमारे प्रदेश में ही है।

मेरा मत है अपने शहर के पर्यावरण को और स्वास्थवर्धक बनाने के लिए हमें सबसे पहले हमारे शहर के जल को प्रदूषण मुक्त करना होगा। कारखानों एवं घर का गंदा पानी, नालियों में प्रवाहित मल-मूत्र, सीवर लाइन के निष्कासित दूषित जल को कान्ह नदी में गिरने से रोकना होगा।

आज शहर में सैकड़ों विकास कार्य निरंतर जारी है। हम सभी जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी है कि पेड़ों को हरसंभव उपायों द्वारा कटने से बचाया जाए। पेड़ों का उचित तरीके से एवं विशेषज्ञ की निगरानी में स्थानांतरण करना एक बेहतर विकल्प है।

वायुप्रदूषण आज के दौर का एक चिंताजनक विषय है। जितनी तेजी से हमारा शहर आगे बढ़ रहा है उसी रफ्तार से शहर में दुपहिया एवं चारपहिया वाहन की तादाद में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इंदौर के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं भी शहर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। इन सभी समस्याओं का एक ही निदान है की आइये हम और आप अधिक से अधिक संख्या में पेड़ लगाए जाएं। साथ ही हम अधिक से अधिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें।

किसी भी कीमत पर लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़े इसके लिए प्रदेश भाजपा सरकार लगातार प्रतिबद्ध है।

हम हमेशा से ही वृक्षारोपण, जल प्रदूषण नियंत्रण, वनों की अवैध कटाई एवं आम जनों के हितों को लेकर जागरूक रहे है। प्रदेशवासियों को एक खुशहाल वातावरण एवं स्वस्थ पर्यावरण देना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।